रांची :- नई श्रम संहिता के तहत लागू व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (केंद्रीय) नियम, 2026 के प्रभावी होने के बाद देश के खनन क्षेत्र में दशकों से चली आ रही वर्कर्स इंस्पेक्टर व्यवस्था समाप्त हो गई है। इसके साथ ही फॉर्म-यू में निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने और जमा करने की कानूनी अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
इस संबंध में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के रामपुर बटुरा ओपनकास्ट प्रोजेक्ट के खान प्रबंधक ने 9 जुलाई 2026 को सभी संबद्ध ट्रेड यूनियनों को पत्र जारी कर नई कानूनी व्यवस्था की जानकारी दी है। उल्लेखनीय है कि यह पत्र मुख्यालय द्वारा नहीं, बल्कि आरबीओसीपी के खान प्रबंधक द्वारा स्थानीय स्तर पर जारी किया गया है।
पत्र में बताया गया है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 8 मई 2026 को अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 345(ई) के माध्यम से व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (केंद्रीय) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नियम संहिता, 2020 की धारा 133 एवं 134 के तहत बनाए गए हैं और इनके लागू होने के साथ ही खान नियम, 1955 सहित कई पुराने केंद्रीय श्रम नियम निरस्त हो गए हैं।
खान नियम, 1955 के तहत वर्कर्स इंस्पेक्टर खदान के श्रमिकों का वैधानिक प्रतिनिधि होता था, जिसे सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों का निरीक्षण करने तथा फॉर्म-यू में अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन और डीजीएमएस को भेजने का अधिकार प्राप्त था। यह व्यवस्था करीब 70 वर्षों से खदानों में श्रमिक भागीदारी आधारित सुरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
हालांकि, नए (केंद्रीय) नियम, 2026 में वर्कर्स इंस्पेक्टर की नियुक्ति, निरीक्षण अथवा फॉर्म-यू रिपोर्ट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। इसी आधार पर स्थानीय प्रबंधन ने ट्रेड यूनियनों को सूचित किया है कि अब केंद्रीय नियमों के तहत वर्कर्स इंस्पेक्टर द्वारा निरीक्षण कराना या फॉर्म-यू रिपोर्ट तैयार करना वैधानिक रूप से आवश्यक नहीं रह गया है तथा सभी यूनियनें वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
यह बदलाव खदानों की सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सुरक्षा निरीक्षण और अनुपालन पूरी तरह ओएसएचडब्ल्यूसी संहिता, 2020 एवं उसके तहत अधिसूचित केंद्रीय नियमों के अनुसार संचालित होगा, जिससे खदानों में श्रमिक प्रतिनिधित्व की पारंपरिक वैधानिक व्यवस्था का एक अध्याय समाप्त हो गया है।




