धनबाद : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय परिणाम कई महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं। पहली नजर में मुनाफा लगभग स्थिर दिखता है, लेकिन आंकड़ों की गहराई में जाएं तो उत्पादन में लगातार गिरावट, मुनाफे में दो वर्षों से जारी दबाव और स्टॉक के सहारे बढ़ते ऑफटेक जैसी तस्वीर सामने आती है।
सीआईएल ने पहली तिमाही में 169.60 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 182.32 मिलियन टन की तुलना में करीब 7 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद कंपनी ने 197.70 मिलियन टन कोयले का ऑफटेक किया, जो उत्पादन से लगभग 28 मिलियन टन अधिक है। इसका सीधा अर्थ है कि कंपनी को बाजार की मांग पूरी करने के लिए अपने स्टॉक का सहारा लेना पड़ा।
मुनाफा बढ़ा, लेकिन सिर्फ नाममात्र
पहली तिमाही में कोल इंडिया का शुद्ध लाभ ₹8,852 करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष यह ₹8,797 करोड़ था। यानी लाभ में केवल ₹55 करोड़ की वृद्धि हुई। प्रतिशत के हिसाब से यह वृद्धि एक प्रतिशत से भी कम है।
लेकिन यदि वर्ष 2024 से तुलना करें तो तस्वीर चिंताजनक है। जून 2024 तिमाही में कंपनी का लाभ ₹10,944 करोड़ था। दो वर्षों में मुनाफा करीब ₹2,092 करोड़ घट चुका है। इससे स्पष्ट है कि उत्पादन लागत, वेतन व्यय, ओवरबर्डन हटाने की बढ़ती लागत और अन्य परिचालन खर्च कंपनी की लाभप्रदता पर असर डाल रहे हैं।
चार वर्षों का ट्रेंड क्या कहता है?(कोयला मिलियन टन में एवं रुपये करोड़ में)
तिमाही उत्पादन – ऑफटेक – लाभ
जून 2026 – 169.60 – 197.70 – 8,852
जून 2025 – 182.32 – 191.04 – 8,797
जून 2024 – 189.28 – 198.92 -10,944
जून 2023 – 175.48 – 186.93 – 10,498
सबसे बड़ा सवाल : उत्पादन घटा तो ऑफटेक कैसे बढ़ा?
यही इस तिमाही का सबसे बड़ा संकेत है। उत्पादन कम होने के बावजूद ऑफटेक बढ़ने का मतलब है कि कंपनी ने पहले से उपलब्ध कोयले के स्टॉक का उपयोग कर बिजलीघरों और अन्य उपभोक्ताओं की मांग पूरी की। यह रणनीति अल्पकाल में तो कारगर है, लेकिन यदि आने वाली तिमाहियों में उत्पादन नहीं बढ़ा तो स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है।
*आगे की राह आसान नहीं
कोल इंडिया ने चालू वित्त वर्ष के लिए महत्वाकांक्षी उत्पादन लक्ष्य तय किया है। लेकिन पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि लक्ष्य हासिल करने के लिए दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही में उल्लेखनीय सुधार करना होगा।
यदि उत्पादन की यही रफ्तार बनी रही तो पूरे वर्ष के उत्पादन लक्ष्य, लाभ और भविष्य के लाभांश (डिविडेंड) पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि मानसून के बाद उत्पादन तेजी से बढ़ता है और लागत नियंत्रण सफल रहता है, तो कंपनी वर्ष की दूसरी छमाही में स्थिति सुधार सकती है।(ग्राफिक्स साभार)



