उपमुख्य श्रमायुक्त ने कहा – समान नहीं,सदस्यता के अनुपात में होगा यूनियनों का प्रतिनिधित्व
रांची : 12वीं जेबीसीसीआई के गठन और भविष्य की वेतन वार्ता की दिशा अब औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के प्रावधानों से तय होती दिखाई दे रही है। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) में यूनियन प्रतिनिधित्व को लेकर 14 जुलाई को हुई सुनवाई में उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय), भुवनेश्वर ने स्पष्ट किया कि जहां किसी एक यूनियन को 51 प्रतिशत समर्थन प्राप्त नहीं है, वहां नेगोशिएटिंग काउंसिल का गठन किया जाएगा तथा प्रतिनिधित्व सदस्यता के अनुपात के आधार पर होगा। कोल जगत में इस टिप्पणी को 12वीं जेबीसीसीआई के गठन और कोल इंडिया की भविष्य की सामूहिक सौदेबाजी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
मामला
एमसीएल ने 30 जून 2026 को एक कार्यालय आदेश जारी कर द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों में सभी संचालित यूनियनों को लगभग समान प्रतिनिधित्व प्रदान कर दिया था। इसके विरोध में ओडिशा कोलियरी मजदूर संघ (ओसीएमएस-इंटक) ने उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।यूनियन का कहना था कि लगभग 38 प्रतिशत सदस्यता होने के बावजूद उसे उन यूनियनों के बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया, जिनकी सदस्य संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है। यह आनुपातिक प्रतिनिधित्व और औद्योगिक लोकतंत्र के सिद्धांत के विपरीत है।
उपमुख्य श्रमायुक्त ने कहा
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 14(4) का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी प्रतिष्ठान में कोई भी यूनियन 51 प्रतिशत या उससे अधिक समर्थन प्राप्त नहीं करती है, तो नियोक्ता को नेगोशिएटिंग काउंसिल गठित करनी होगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि इस काउंसिल में केवल 20 प्रतिशत या उससे अधिक सदस्यता रखने वाली पंजीकृत यूनियनें शामिल होंगी तथा प्रतिनिधित्व सदस्य संख्या के अनुपात के आधार पर दिया जाएगा। इसी आधार पर एमसीएल को अपनी समितियों की संरचना में आवश्यक संशोधन करने की सलाह दी गई।
12 वीं जेबीसीसीआइ के लिए अहम है टिप्पणी
11वीं जेबीसीसीआई का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो चुका है और 12वीं जेबीसीसीआई के गठन की प्रक्रिया शुरू होनी है। ऐसे समय में डीसीएलसी की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कोल इंडिया पहले ही औद्योगिक संबंध संहिता के अनुरूप नेगोशिएटिंग यूनियन एवं नेगोशिएटिंग काउंसिल की व्यवस्था लागू करने की दिशा में विचार-विमर्श कर रहा है।यदि कोल इंडिया इस वैधानिक व्याख्या के अनुरूप आगे बढ़ता है, तो भविष्य में जेबीसीसीआई की संरचना, द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों का गठन और वेतन वार्ता में यूनियनों की भागीदारी सदस्यता के अनुपात पर आधारित हो सकती है।
मामला सीआईएल के पास
बैठक के दौरान एमसीएल प्रबंधन ने बताया कि इस पूरे मामले को आगे के दिशा-निर्देश के लिए कोल इंडिया मुख्यालय भेज दिया गया है। साथ ही यह भी सहमति व्यक्त की गई कि 30 जून 2026 के आदेश के आधार पर गठित समितियों की कोई बैठक तब तक नहीं होगी, जब तक आनुपातिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तय नहीं हो जाता।
दूरगामी असर की संभावना
हालांकि उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) की यह कार्यवाही न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं है, लेकिन यह औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की वैधानिक व्याख्या को सामने लाती है। ऐसे में 12वीं जेबीसीसीआई के गठन, यूनियनों की मान्यता, सामूहिक सौदेबाजी की प्रक्रिया और कोल इंडिया की औद्योगिक संबंध व्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर पूरे कोयला उद्योग की निगाहें अब कोल इंडिया मुख्यालय के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।




