रांची : कोयला एवं अन्य भूमिगत खदानों में बचाव कार्यों को अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत 1 जुलाई 2026 को जारी चार अलग-अलग अधिसूचनाओं के माध्यम से उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाएं (केंद्रीय) नियम, 2026 के अंतर्गत बचाव दलों के प्रशिक्षण, श्वास उपकरणों के परीक्षण, दुर्घटना रिपोर्टिंग तथा बचाव अभियानों के दौरान संचार व्यवस्था के लिए विस्तृत मानक निर्धारित किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, अब बचाव केंद्रों और बचाव कक्षों में उपलब्ध प्रत्येक श्वास एवं पुनर्जीवन उपकरण का कम से कम हर महीने परीक्षण अनिवार्य होगा। ऑक्सीजन सिलेंडर के दबाव, उपकरणों में रिसाव, ऑक्सीजन की शुद्धता, फ्लो मीटर तथा अन्य सुरक्षा मानकों की जांच कर उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। एक प्रतिशत से अधिक अशुद्धि वाली ऑक्सीजन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
डीजीएमएस ने बचाव प्रशिक्षित कर्मियों के लिए विस्तृत प्रशिक्षण एवं अभ्यास कार्यक्रम भी निर्धारित किया है। प्रत्येक बचावकर्मी को वर्ष में कम से कम आठ अभ्यास करने होंगे, जिनमें भूमिगत खदानों में श्वास यंत्रों के साथ अभ्यास, कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), रस्सी बचाव, हाइड्रोलिक कटर, स्प्रेडर, जैक, लिफ्टिंग बैग, रिंग सॉ तथा अग्निशामक यंत्रों के उपयोग का प्रशिक्षण शामिल रहेगा। यदि कोई बचावकर्मी चार महीने से अधिक समय तक अभ्यास से दूर रहता है, तो उसे पुनः सक्रिय होने के लिए विशेष पांच दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण लेना होगा।
बचाव अभियानों के दौरान टीम के सदस्यों के बीच संचार को भी मानकीकृत किया गया है। अधिसूचना के अनुसार एक हॉर्न “संकट”, दो हॉर्न “रुकना”, तीन हॉर्न “पीछे हटना” तथा चार हॉर्न “आगे बढ़ना” का संकेत होगा। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में भ्रम की संभावना को समाप्त करना और त्वरित समन्वय सुनिश्चित करना है।
एक अन्य अधिसूचना के तहत भूमिगत खदान, बचाव केंद्र अथवा बचाव कक्ष में बचाव उपकरणों के उपयोग के दौरान होने वाली किसी भी दुर्घटना की रिपोर्टिंग के लिए एक समान मानक प्रपत्र निर्धारित किया गया है। इसमें दुर्घटना का समय, स्थान, मृतक एवं घायल व्यक्तियों का विवरण, उपयोग किए गए उपकरण का मॉडल, सीरियल नंबर, दुर्घटना के कारण सहित सभी आवश्यक जानकारियां अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होंगी और रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता तथा संबंधित निरीक्षक को भेजनी होगी।




