रांची :- मंगलवार 27 मई को सीआएल के कंपनी सचिव द्वारा सीआईएल कर्मचारियों को गोपनीय, सवेंदनशील कागजातों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट करने पर रोक लगाने सबंधी कार्यालय आदेश जारी किया गया था।इसके बाद बवाल मच गया।कर्मचारियों के जेहन में कई सवाल कौंधने लगे कि आखिर अचानक प्रबंधन ने ये सेंसरशिप का पत्र क्यों जारी किया ?इस बारे में एक सीआईएल के एक अधिकृत सूत्र ने स्थिति को साफ करते हुए कहा, ” प्रबंधन की मंशा सोशल मीडिया और सकारात्मक आलोचना, आलोचना से कोई परहेज नहीं था,न है।लेकिन कुछ ऐसे कागजात हैं जो सीआईएल बोर्ड में स्वीकृत होने के पूर्व ही सोशल मीडिया में वायरल हो जा रहे हैं,ये गम्भीर मामला है।कंपनी को सेबी को जवाब देना पड़ता है “। वहीं एक अन्य विश्वस्त सूत्र के मुताबिक ,” ड्रेश कोड से जुड़ा 10 पेज का दस्तावेज बिना बोर्ड में प्रस्तुत हुए ही वाइरल हो गया।ये सीआईएल बोर्ड के लिए तैयार किया गया था।वायरल होने के बाद प्रबंधन अति गम्भीर हो उठा और सीआईएल मुख्यालय के लगभग एक दर्जन कर्मचारियों के मोबाइल को जमा कर उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।ताकि पता चल सके की किसने ड्रेस कोड से जुड़े कागजात किसी को सेंड किए।



