रांची :- देश के सभी सार्वजनिक उद्योगों पर निजीकरण की तलवार लटक रही है।कोयला खदानों को एमडीओ मोड एवं रेवेन्यू शेयर पर पूंजीपतियों को दिया जा रहा है।केंद्र सरकार का उद्योगों एवं मजदूरों पर लगातार हमला जारी है।ये हमला तब रुकेगा जब जोरदार विरोध होगा।यह लड़ाई,संघर्ष आंदोलन अस्तित्व बचाने के लिए है।अगर हम विरोध नहीं किए,संघर्ष नहीं किए तो न उद्योग बचेगा और न ही मजदूर।यह बात सीटू के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व सांसद तपन सेन ने कही।वे ऑल इंडिया कोल वर्कर फेडरेशन के दो दिवसीय बैठक में भाग लेने रांची आए हैं।बैठक सीएमपीडीआई परिसर में हो रही है।उन्होंने कहा कोयला उद्योग, कोल इंडिया पर लगातार हमला बढ़ता जा रहा है।कोयला खदानों को निजी मालिकों को एमडीओ मोड एवं राजस्व शेयरिंग के आधार पर दिया जा रहा है।जहां मजदूरों का शोषण हो रहा है।मजदूरों को शोषण मुक्त के लिए कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया था।वर्तमान सरकार कोयला खदानों का निजीकरण करके इतिहास का चक्का पीछे की ओर ले जा रही है। उन्होंने कहा निजीकरण होने से बिजली उत्पादन पर निजी मालिको का कब्जा होगा और वे जो चाहेंगे,वो करेंगे।रेनेवल एनर्जी के नाम पर यूरोप में दो – चार निजी कंपनियों का मनमानी चलता है वैसे ही यहाँ होगा।लेबर कोड के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार तय कर चुकी है कि इसे लागू करना है।यूनियनों से बात करना तो मात्र एक बहाना है। सरकार की नीयत अगर सकरात्मक होती तो लेबर कोड बनाने से पहले यूनियनों से बात करना चाहिए था,यूनियनों के सुझाव पर अमल करना चाहिए था। अब यूनियनों से बातचीत एक दिखावा मात्र है।उन्होंने कहा सरकार के उद्योग एवं मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुटता के साथ संघर्ष करना होगा, अन्यथा अस्तित्व नहीं बचेगा।ये सरकार केवल विरोध की बात ही सुनती है।




