धनबाद :- एनसीएल में इंटक की यूनियन राष्ट्रीय कोलियरी श्रमिक संघ(आरसीएसएस) में तख्ता पलट के बाद दोनों गुट खुलकर आमने – सामने आ गए हैं।निवर्तमान अध्यक्ष ओपी मालवीय का कहना है कि वे असली आरसीएसएस हैं, सभी कार्यकर्ता मेरे साथ हैं,जबकि नए महामंत्री लाल पुष्पराज सिंह का कहना है कि ट्रेड यूनियन रजिस्टार भोपाल ने उनकी कमेटी को फार्म ई में दर्ज किया है।उच्च नेतृत्व पूरी तरह से अवगत है।जिसको जो बोलना है बोलते रहे। दोनों गुटों के अपने अपने दावे एवं तर्क हैं। लेकिन दस्तावेज बताते हैं ट्रेड यूनियन रजिस्टार भोपाल द्वारा फार्म ई में लाल पुष्पराज सिंह के नेतृत्व वाला कमेटी ही दर्ज है।वहीं इस प्रकरण पर ट्रेड यूनियन विशेषज्ञ कहते हैं कि अब एनसीएल में भी असली – नकली का खेल शुरू हो गया है।इससे आरसीएसएस,इंटक और मजदूरों को ही हानि है।वहीं भरोसे मंद सूत्रों के मुताबिक पुष्पराज सिंह द्वारा एनसीएल प्रबंधन को दिए गए पत्र के आलोक में एनसीएल प्रबंधन ने ट्रेड यूनियन रजिस्टार भोपाल से जांच कराने की बात कही है।आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक एनसीएल प्रबंधन ट्रेड यूनियन रजिस्टार को पत्र लिख कर पूछेगा की असली आरसीएसएस कौन है जिसे आईआर में शामिल किया जाए। ट्रेड यूनियन रजिस्टार के यहां से जवाब आने के बाद ही यह तय होगा कि किस गुट को आईआर में शामिल किया जाए।
शनिवार को श्री मालवीय ने अपने समर्थकों एवं मीडिया से कहा कि अक्टूबर 2021 में वार्षिक अधिवेशन हुआ था, इस नाते 2024 में अक्टूबर महीने में वार्षिक अधिवेशन होना है जिसमें नयी केंद्रीय कमेटी गठन होगा। इसलिए यह कहना गलत है कि केंद्रीय कमेटी के गठन में देर हुई।वहीं पुष्पराज गुट से जुड़े सूत्रों ने कहा कि मालवीय गलत बयानी कर रहे हैं। साल 2021 के मार्च महीने में केंद्रीय कमेटी का गठन हुआ था,ये लोग नयी केंद्रीय कमेटी का गठन नहीं कर रहे थे,इसलिए 31 मार्च 2024 को हमलोगों ने नयी केंद्रीय कमेटी का चुनाव किया। सूत्र का यह भी कहना है की नयी कमेटी में शामिल होने के मालवीय गलत बयानी कर रहे हैं और प्रेशर टैक्टिस पालिसी पर चल रहे हैं। वे इस तरह के बयान अपने मात्र कुछ उनके समर्थकों को साथ रखने के लिए दे रहे हैं। मजदूर राजनीति पर गहरी पैठ रखने वाले कहते हैं – इंटक और इससे जुड़े संगठनों की बाहरी दुश्मनों की जरूरत ही नहीं है। इनके नेताओं का पदमोह एवं महत्वकांक्षा ही बर्बादी का कारण है। राष्ट्रीय स्तर की बात हो या बीसीसीएल या डब्ल्यूसीएल। हालांकि डब्ल्यूसीएल में श्री जामा एवं केके सिंह में समझौता हुआ। लेकिन बीसीसीएल में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ ददई दुबे,ललन चौबे काबिज हैं और विधायक अनूप सिंह को एक नया संगठन बनाना पड़ा। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर ये फैसला नहीं हो पाया है कि असली इंटक ददई दुबे गुट है या संजीवा रेड्डी गुट। मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। एक वरिष्ठ इंटक नेता गोपनीयता की शर्त पर कहते हैं , ” इंटक को आग लग गयी, इंटक के चराग से “।




