तिरुवनंतपुरम 27 जुलाई :- भारत के ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों (कोयला, पेट्रोलियम, विद्युत) के प्रमुख कर्मचारी महासंघों के प्रतिनिधियों की आज तिरुवनंतपुरम स्थित बी.टी.आर. स्मारक पर संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक का उद्देश्य इन तीनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के संघर्षों का समन्वय कर एक व्यापक साझा अभियान शुरू करना था।
अखिल भारतीय कोयला कर्मचारी महासंघ (AICWF), पेट्रोलियम एवं गैस कर्मचारी महासंघ (PGWFI) तथा विद्युत कर्मचारी महासंघ (EEFI) के नेताओं ने सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, सार्वभौमिकता तथा ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा के लिए समन्वित संघर्ष किया जाएगा। इस दिशा में नेशनल फोरम ऑफ एनर्जी सेक्टर वर्कर्स की तैयारी हेतु एक समिति गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष एलामारम करीम होंगे तथा स्वदेश देवरॉय, प्रदीप मायकर और जी.के. श्रीवास्तव उपाध्यक्ष होंगे। डी.डी. रामनंदन, नागेन चुतिया और सुदीप दत्ता को संयोजक नियुक्त किया गया है।
बैठक में ऊर्जा क्षेत्र पर हो रहे नीति आधारित हमलों तथा सार्वजनिक हित की रक्षा की आवश्यकता पर गंभीर चर्चा हुई। आज की बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि ऊर्जा क्षेत्र के स्थायी एवं संविदा (ठेका) दोनों प्रकार के कर्मचारियों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय कन्वेंशन का आयोजन दिल्ली में नवंबर 2025 में किया जाएगा। इस कन्वेंशन का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण और ठेका प्रणाली के खिलाफ साझा आवाज़ उठाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करना होगा।
साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) की वर्तमान अवधारणा का वैज्ञानिक व वस्तुनिष्ठ अध्ययन किया जाएगा, और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र, इससे जुड़े सहयोगी कार्यबल तथा खुदरा/परिधीय कार्यबलों में यूनियन गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।
बैठक की शुरुआत में एलामारम करीम ने उद्घाटन टिप्पणी प्रस्तुत की। इसके बाद स्वदेश देवरॉय द्वारा एक पृष्ठभूमि पत्र तथा ईईएफआई के महासचिव सुदीप दत्ता द्वारा एक पूरक पत्र प्रस्तुत किया गया। एआईसीडब्ल्यूएफ के महासचिव डी.डी. रामनंदन तथा पीजीडब्ल्यूएफआई के महासचिव नागेन चुतिया ने मुख्य वक्तव्य रखे।
बैठक में दीपा के. राजन, प्रदीप मायकर, जी.के. श्रीवास्तव, एम.जी. सुरेश कुमार, प्रदीप श्रीधरन, आर.पी. सिंह, अमल भट्टाचार्य, बी. बालगोपाल, और एम.जी. अजी ने भी अपने विचार रखे।



