नई दिल्ली: कोयला मंत्रालय ने सुषमा स्वराज भवन में “चिंतन शिविर 2.0” का आयोजन किया, जिसमें कोयला क्षेत्र के भविष्य को आकार देने के लिए नवाचार, स्थिरता और सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने की और सह-अध्यक्षता राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने की। कोयला सचिव विक्रम देव दत्त,एडिशनल सेक्रेटरी रुपिंदर बरार, सीआईएल चेयरमैन पीएम प्रसाद,और अन्य कोयला पीएसयू के सीएमडी और निदेशकों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने विचार-विमर्श में भाग लिया।
अपने संबोधन में श्री रेड्डी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिरता की ओर बढ़ने में कोयला क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ तकनीकों को अपनाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और खनन प्रथाओं को वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के साथ संरेखित करने पर जोर दिया। खनन कार्यों में सुरक्षा और मजबूत खदान बंद करने की व्यवस्था को शीर्ष प्राथमिकताओं के रूप में पहचाना गया, साथ ही स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आजीविका को बढ़ाने के लिए सामुदायिक कल्याण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर बल दिया।कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कोयला उत्पादन में वृद्धि करने और देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए निकासी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चाओं में कोयला परिवहन बुनियादी ढांचे में सुधार और पर्यावरण के प्रति जागरूक प्रथाओं को एकीकृत करने पर प्रकाश डाला गया।





