रांची : स्टैंडिंग कमेटी ऑन सेफ्टी इन कोल माइंस की 50 वीं बैठक 12 नवंबर को दिल्ली में हुई।बैठक की अध्यक्षता कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने किया।ये मीटिंग 11 महीने के बाद हुई।49 वीं मीटिंग 17 दिसंबर 2024 को हुई थी।मीटिंग में पीट, एरिया लेबल की बातें अधिक हुई।पॉवर प्रजेंटेशन द्वारा दुर्घटनाओं की प्रस्तुति दी गयी।जिसमें दिखाया गया कि 67 % दुर्घटना एसओपी,लापरवाही, माइंस रूल्स के उल्लंघन के कारण हुआ।सीटू प्रतिनिधि मानस मुखर्जी ने कहा कि इस कमेटी की मीटिंग में जो बातें होती हैं उसका पालन खुद ये कमेटी नहीं करती।पिछले मीटिंग में तय हुआ था कि 6 महीने में मीटिंग होगी।लेकिन कितने समय बाद मीटिंग हो रही है? जब इस उच्च कमेटी का ये हाल है तो पीट, एरिया और कंपनी स्तरीय सेफ्टी कमेटी के बारे अंदाज लगाया जा सकता है।मीटिंग खत्म होने के बाद सब भूल जाते हैं।उन्होंने मीटिंग में निजी खान मालिकों के अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।श्री मुखर्जी ने कहा कि हर बार स्टेच्युरी मैन पॉवर, चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है।हर मीटिंग में इस पर चर्चा होती है।लेकिन रिक्त पद भरने की दिशा में कोई पहल नहीं होती।सीआईएल के उत्पादन में ठेका मजदूरों की अहम भूमिका है।कुल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी करीब 65 % है।लेकिन उन्हें न सेफ्टी, न निर्धारित वेतन मिलता है,न मेडिकल और न ही वेलफेयर की कोई सुविधा मिलता है।बैठक में ओसीपी एवं बंद खदानों का फेंसिंग करने की बात कही गयी।बैठक में अवैध खनन का मुद्दा भी उठा।कहा गया अवैध खनन वाले क्षेत्रों में कोई पदाधिकारी रहना नहीं चाहता।वे तबादला के लिए पैरवी करते हैं।बैठक में कोल सचिव,सीआईएल के प्रभारी चेयरमैन,सभी अनुषंगी इकाइयों के सीएमडी,डीटी, और मानस मुखर्जी(सीटू),सीजे जोसेफ(एटक),सिद्धार्थ गौतम(एचएमएस),रमेश बल्लेवार,संजय सिंह(बीएमएस), डीएन सिंह(CMOAI),आरके शर्मा(IMMA) उपस्थित थे।
रेड्डी नहीं हुए शामिल :- बीएमएस के कोल प्रभारी केएल रेड्डी इस बैठक में शामिल नहीं हुए।उनकी जगह एसईसीएल सेफ्टी बोर्ड सदस्य संजय सिंह शरीक हुए।इसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं।बीसीसीएल बीएमएस के एक नेता ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि रेड्डी जी कहते हैं कि मीटिंग में कुछ होता है नहीं है।पर बात कुछ और ही है।काफी जोर देने पर उन्होंने बताया कि, “मंत्री जी भाव नहीं देते हैं ये असली कारण है।ये हैदराबाद में सीएमपीएफओ का मुख्यालय या हैदराबाद स्थित सीएमपीएफओ कार्यालय में ट्रेनिंग सेंटर खोलवाना चाहते थे,जिसमें सफलता नहीं मिली।सीएमपीएफओ के बीओटी मीटिंग में पहले स्थान पर बैठना चाहते हैं,किसी भी मामले में मंत्री से कोई सहयोग नहीं मिला,ये है असली कारण “। डिस्क्लेमर :- कोल न्यूज़ नेटवर्क(सीएनएन) उक्त नेता की बातों की पुष्टि नहीं करता।




