रांची :-ओड़िसा हाई कोर्ट ने WP(C) No. 4007 of 2026 की 08.04.2026 को सुनवाई के बाद आदेश पारित किया।जिसमें याचिकाकर्ता Orissa Collieries Mazdoor Sangha (OCMS) और प्रतिवादी Union of India एवं अन्य हैं। आदेश का संबंध MCL (Mahanadi Coalfields Limited) की समितियों में यूनियन की भागीदारी से है।
आदेश की मुख्य बातें
- विवाद का विषय
MCL द्वारा 29.01.2026 के पत्र के माध्यम से OCMS यूनियन को MCL की वैधानिक/अवैधानिक, द्विपक्षीय (bi-partite) एवं त्रिपक्षीय (tri-partite) समितियों में भाग लेने से रोक दिया गया था। - MCL का आधार
- CIL (Executive Director HR) की ई-मेल राय (16.10.2025) कि INTUC/OCMS को इन बैठकों में शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है।
- ओडिशा के Advocate General की 19.01.2026 की राय कि OCMS को समितियों से बाहर रखा जा सकता है।
- इन्हीं रायों के आधार पर MCL ने OCMS की भागीदारी समाप्त कर दी।
- याचिकाकर्ता (OCMS) का तर्क
- MCL का आदेश बिना विचार (non-application of mind) के पारित किया गया।
- OCMS द्वारा शो-कॉज नोटिस के जवाब में दिए गए तथ्यों/दस्तावेजों पर विचार नहीं किया गया।
- केवल Advocate General की राय को आधार बनाकर निर्णय ले लिया गया।
- निर्णय में कारण (reasons) नहीं दिए गए।
- न्यायालय की प्रारंभिक राय
कोर्ट ने माना कि:- MCL का पत्र सही तरीके से संरचित नहीं है।
- यह prima facie दर्शाता है कि निर्णयकर्ता ने स्वयं स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया।
- इतना गंभीर विषय (समितियों में भागीदारी का अधिकार) केवल कानूनी राय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।
- महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ
न्यायालय ने विशेष रूप से Mines Rules, 1955 के Rules 29Q एवं 29U का उल्लेख किया, जो खदानों में समितियों में प्रतिनिधित्व से जुड़े हैं। - कोर्ट का अंतिम निर्णय
- 29.01.2026 का MCL का पत्र रद्द (quash) कर दिया गया।
- मामला MCL को नए सिरे से (de novo) निर्णय लेने के लिए वापस भेजा गया।
- MCL को निर्देश दिया गया कि सभी पक्षों को सुनकर, व्यापक विचार कर 8 सप्ताह के भीतर नया निर्णय ले।
- सभी पक्षों के तर्क खुले रखे गए (all contentions kept open)।
- निष्कर्ष
कोर्ट ने OCMS को तुरंत समितियों में बहाल नहीं किया, लेकिन MCL के आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया और MCL को निष्पक्ष, तर्कसंगत एवं विचारपूर्ण नया निर्णय लेने का निर्देश दिया। - कोर्ट ने कहा कि MCL ने बिना समुचित विचार और कारण दिए OCMS को समितियों से बाहर किया, जो कानूनन सही नहीं है। इसलिए आदेश रद्द कर मामला पुनः MCL को भेजा गया।





