धनबाद:- कोयला कर्मचारियों – अधिकारियों का पेंशन फंड महासंकट में हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि अगर तत्काल इस महासंकट से निजात पाने की ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में पेंशन भुगतान असंभव हो जाएगा।हालांकि इस महासंकट का समाधान ढूंढने के लिए कोयला मंत्रालय के अपर सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित हुई है और इस कमेटी की एक जुलाई को पहली बैठक हो चुकी है। वहीं एक भारतीय मजदूर संघ द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मिलकर 15000 वेतन पर 1.16 प्रतिशत का अंशदान केंद्र सरकार को देने का आग्रह किया। वर्तमान में केंद्र सरकार 1.66 प्रतिशत 1600 रुपये वेतन मानकर अंशदान देती है।पेंशन फंड के जानकार इस मांग को हास्यप्रद करार देते हुए कहते हैं ये मांग ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अगर सचमुच में बीएमएस नेता पेंशन फंड बचना चाहते हैं,चाहते हैं की सभी कामगारों को निर्बाध पेंशन प्राप्त होता रहे तो केंद्र सरकार से पेंशन फंड के लिए 20 – 25 हजार करोड़ एकमुश्त मांगना चाहिए। बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के पिछले मीटिंग में यह बात सामने आयी थी की पेंशन फंड भारी घाटे है।
कारण
आंकड़े कहते हैं कि पेंशन फंड में अंशदान करने वालों की संख्या लगातार घट रही है , और पेंशन लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक :-
वर्ष अंशदान भुगतान
2020- 21 4503.46 3831.54
2021- 22 3646.24 4449 .74
2021 – 22 3592.79 4689. 75
【राशि करोड़ में】
उपरोक्त अंशदान में सीआईएल द्वारा पेंशन फंड में 10 रुपया प्रति टन दिया गया राशि भी है। आरटीआई से सीआईएल द्वारा पिछले दो वर्षों में दिए गए अंशदान इस प्रकार है :-
वर्ष राशि ( करोड़ में)
2021 – 22 528 . 62
2022 – 23 774 . 60
सीआईएल द्वारा 10 रुपया प्रति टन अंशदान यूनियन नेताओं द्वारा बनाए गए दवाब का परिणाम है।10 वें जेबीसीसीआइ संपन्न होने के बाद यूनियन नेताओं ने दवाब बनाया था।काफी मशक्कत के बाद सीआईएल सितंबर 2020 में पेंशन फंड में 10 रुपया प्रति टन अंशदान देने पर तैयार हुआ था।




