धनबाद :- कोल इंडिया के श्रमिक संगठनें सेवानिवृत्त कोयला मजदूरों के हक व अधिकार की रक्षा करने में पूरी तरह से असफल रहे हैं। उन्हें हमारी कोई चिंता नहीं,चिंता है तो केवल इतना कि उनकीं दुकानदारी कैसे चलती रहे। वे प्रबंधन और सरकार के रहमों करम पर केवल अपनी दुकान चला रहे हैं। ये दर्द है कुछ सेवानिवृत्त कोल कर्मियों का जो कोल न्यूज़ नेटवर्क से बयां कर रहे थे।उनका कहना था पेंशन,सीपीआरएमएस या एक जनवरी 2017 से 28 मार्च 2018 के बीच रिटायर हुए लगभग 19 हजार सेवानिवृत्त कर्मियों को 20 लाख ग्रेच्युटी का मामला हो,सब में यूनियनों के नेताओं ने मुंह को बंद कर रखा है। उपरोक्त मुद्दों पर मुंह खोलते ही नहीं,मुंह खोलेंगे तो प्रबंधन से मिलने वाला सुविधा बंद हो जाएगा। श्री शर्मा कहते हैं देश के केंद्रीय व राज्य सरकार के कर्मियों को 1.1.2016 से 20 लाख ग्रेच्युटी का भुगतान होता है।जबकि संशोधित ग्रेच्युटी एक्ट मार्च 2018 में संसद से पारित हुआ।इतना ही नहीं कोल इंडिया में अधिकारियों को एक जनवरी 2017 से भुगतान होता है।जबकि कर्मचारियों को 28 मार्च 2018 से। उन्होंने बताया कि इस पर पत्र लिखने पर 2018 से 2019 तक कोल इंडिया प्रबंधन सक्रिय हुआ।यूनियनों के दवाब में प्रबंधन ने एक जनवरी 2017 से 28 मार्च 2018 के बीच रिटायर हुए कोल कर्मियों का सर्वे कराया। जिसमें लगभग 19 हजार कोल कर्मियों की पहचान हुई। इसके बाद यूनियन नेता कुम्भकर्णी नींद में सो गए। वे कहते हैं कोल अधिकारियों को एक जनवरी 2017 से और कर्मचारियों को 28 मार्च 2018 से 20 लाख ग्रेच्युटी भुगतान एक अपराध है।संविधान द्वारा प्रदत्त ” समानता का अधिकार ” का उल्लंघन है, लेकिन सब चुप हैं। इतना ही नहीं रिटायर कोल कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी से इस मुद्दे पर मिला, उन्हें ज्ञापन दिया। तब श्री जोशी ने तत्कालीन वित्त मंत्री को एक पत्र लिखा जिसमें का यह भेदभाव भरा नोटिफिकेशन है। इसे 2016 से लागू होना चाहिए। सेवानिवृत्त कर्मी कहते हैं कि अगर मजदूर संगठन चाह लें तो ये संभव है। मगर वे चाहते ही नहीं हैं। मजदूर संगठन इस मुद्दे पर आंदोलन का पत्र दें ,फिर देखिए प्रबंधन सुनता है।वे आगे कहते हैं कि पेंशन सुधार,सीपीआरएमएस , मेडिकल अनफिट(9.4.0) का मुद्दा यूनियनों की उदासीनता का शिकार हो गयी हैं।





