रांची : -एनसीएल में एक बार फिर एटक की यूनियन सीएमएस 3553 सदस्यों के साथ पहले स्थान पर,2940 सदस्यों के साथ बीएमएस दूसरे ,2803 सदस्यों के साथ इंटक के आरसीएसएस तीसरे एवं 2346 सदस्यों के साथ एचएमएस के केएसएस चौथे स्थान पर है।इन सब के बीच आरसीएसएस महामंत्री लाल लाल पुष्प राज सिंह के एक पत्र में बीएमएस और एचएमएस के कंपनी के कॉरपोरेट जेसीसी,वेलफेयर, सेफ्टी आदि समितियों में प्रतिनिधित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।कंपनी के निदेशक एचआर को लिखे पत्र में श्री सिंह ने एनसीएल के आईआर कोड का हवाला देते हुए समितियों से बाहर करने की मांग किया है।श्री के पत्र से प्रबंधन भी पेशो पेश में हैं।श्री के पत्र के जवाब में एचएमएस और बीएमएस ने भी प्रबंधन पत्र लिख कर इंटक को बाहर करने का मांग करते हुए लिखा कि इंटक में विवाद है,कोड कंडक्ट के अनुसार इस संगठन को आईआर में नहीं रखा जा सकता।
सदस्यता आंकड़े :- एनसीएल का कोड ऑफ कंडक्ट कहता है, ” जो केंद्रीय ट्रेड यूनियनें (CTUs) जेबीसीसीआई (JBCCI) में प्रतिनिधित्व रखती हैं, यदि वे आधे या उससे अधिक परियोजनाओं में 25 प्रतिशत या उससे अधिक सदस्यता प्राप्त कर लेती हैं, तो वे कंपनी स्तर पर संयुक्त परामर्श समिति (JCC), कल्याण (Welfare), सुरक्षा (Safety) आदि समितियों के गठन/प्रतिनिधित्व की हकदार होगीं “। सदस्यता आकड़ो के मुताबिक एटक को 9 परियोजनाओं में 25 %, बीएमएस को 6 परियोजनाओं में 25 % ,आरसीएसएस को 8 परियोजनाओं में 25 % और एचएमएस को 5 परियोजनाओं में 25 % सदस्यता है।इस आधार पर बीएमएस और एचएमएस कंपनी के कोड ऑफ कंडक्ट को पूरा नहीं करते हैं।आरसीएसएस महामंत्री ने इसी आधार पर एचएमएस और बीएमएस को समितियों में शामिल किए जाने सवाल उठाया है।उन्होंने यह सभी सवाल उठाया है कि बीएमएस की दो यूनियनें हैं,दोनों का अलग अलग रजिस्ट्रेशन और संविधान है , तो दोनों की सदस्यता एक साथ क्यों जोड़ा जाता है।यूनियनों की आपसी वार – पलटवार का परिणाम देखना दिलचस्प होगा कि प्रबंधन क्या निर्णय लेता है।चर्चा है कि प्रबंधन मेल – मिलाप कराने के प्रयास में है ताकि जैसा चलते आ रहा है वैसे ही चलता रहे।





