रांची :- झारखंड विधानसभा चुनाव में कई मजदूर नेता चुनावी मैदान में हैं।कई तो एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं।वैसे ही एक मजदूर नेता हैं कुमार जयमंगल सिंह। जो इंटक के उपाध्यक्ष, राष्टीय खान मजदूर फेडरेशन के अध्यक्ष,राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष हैं। कुमार जयमंगल सिंह इस चुनाव में भी बेरमो विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं।वहीं उनके सामने भाजपा के पूर्व सांसद रविंद्र पांडेय और ख़्तियानी भाषा आंदोलन को लेकर चर्चा में जयराम महतो हैं।श्री पांडेय गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से 5 बार सांसद रह चुके हैं और उनका कार्यक्षेत्र भी बेरमो ही है।उल्लेखनीय है श्री सिंह इंटक के सुप्रसिद्ध नेता स्व राजेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र हैं।श्री सिंह 6 बार विधायक रह चुके थे।उनके निधन के बाद 3 नवंबर 2020 को हुए उप चुनाव में कुमार जयमंगल सिंह ने भाजपा के योगेश्वर महतो बाटुल को लगभग 14 हजार वोटों से पराजित कर चुनाव जीते थे।राजनीतिक पंडित कहते हैं कि इस वर्ष का चुनाव जयमंगल सिंह के लिए आसान नहीं है।2020 के उप चुनाव में उन्हें अपने पिता के निधन के कारण सहानुभूति वोट पर सवार होकर जीता था।इस बार श्री पांडेय एवं जयराम महतो के चुनावी मैदान में आने से चुनाव रोचक हो गया है।बीते लोकसभा चुनाव में जयराम महतो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।जिसमें उन्होंने बेरमो विधानसभा से 53393 वोट मिले थे।रविंद्र पांडेय भी राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी है।ऐसे में जयमंगल सिंह की जीत को लेकर कोई भी दावा नहीं कर सकता।क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के युवाओं में जयराम महतो को लेकर एक अलग ही क्रेज है।महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जयराम महतो ,जयमंगल सिंह का खेल बिगाड़ेंगे या रविन्द्र पांडेय का ? इसका नतीजा 23 नवम्बर को ही पता चलेगा।लेकिन बेरमो इलाके में इस बात की चर्चा जोरों पर हैं कि क्या जयमंगल अपने पिता की विरासत को बचा पाने सफल होंगे या असफल।





