रांची :केंद्र सरकार द्वारा चार लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से लागू कर दिया गया।इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गयी ।इन चार लेबर में से एक लेबर कोड इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020(आईआर 2020) ऐसा है,जिनसे कोल इंडिया में कई यूनियनों का इतिहास, भूगोल छोड़िए,12 वें जेबीसीसीआइ का बदल जाएगा।10 वें और 11 वें जेबीसीसीआइ में बीएमएस,एचएमएस,इंटक 4 – 4 और एटक,सीटू 3 – 3 सदस्य रहे हैं। वर्तमान में सभी यूनियन आपसी सहमति से सभी कमेटियों में थोड़ा कम ,थोड़ा ज्यादा प्रतिनिधित्व करती हैं।लेकिन आईआर 2020 लागू हो जाने के बाद सारे समीकरण ध्वस्त हो जाएंगे।कोल इंडिया की यूनियनें (सीटू छोड़ कर ) ” वर्क्स कमेटी ” का विरोध करते आयीं है,वो यूनियनें इस कोड को कैसे लेती हैं ये देखना दिलचस्प होगा। वर्क्स कमेटी के विरोध में बीएमएस ने बाकायदा जबलपुर हाई कोर्ट में केस भी किया है। आईआर 2020 की धारा 14 यूनियनों के लिए अतिमहत्वपूर्ण है।धारा 14:- कहता है :- वार्ता यूनियन/ वार्ता परिषद :-
🔹 मुख्य प्रवधान
*जिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों में पंजीकृत ट्रेड यूनियन मौजूद है, वहाँ नियोक्ता से बातचीत के लिए वार्ता यूनियन या वार्ता परिषद का गठन अनिवार्य होगा।
*यदि प्रतिष्ठान में केवल एक ट्रेड यूनियन कार्यरत है, तो उसे श्रमिकों की एकमात्र वार्ता यूनियन के रूप में मान्यता दी जाएगी।
*यदि कई ट्रेड यूनियन कार्यरत हों, तो जिस यूनियन के पास 51% या उससे अधिक श्रमिकों का समर्थन होगा, उसे एकमात्र वार्ता यूनियन के रूप में मान्यता मिलेगी।
*यदि किसी यूनियन के पास 51% समर्थन नहीं है, तो नियोक्ता द्वारा वार्ता परिषद गठित की जाएगी।
*वार्ता परिषद ऐसे ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों से बनेगी जिन्हें:
*मस्टर रोल में दर्ज कर्मचारियों के कम से कम 20% समर्थन प्राप्त हों
*प्रत्येक 20% समर्थन पर एक प्रतिनिधि शामिल होगा
*वार्ता परिषद और नियोक्ता के बीच हुए निर्णय को वैध माना जाएगा, यदि परिषद में यूनियन प्रतिनिधियों के बहुमत द्वारा सहमति प्रदान की जाए।मान्यता प्राप्त वार्ता यूनियन या गठित वार्ता परिषद की अवधि:
*3 वर्ष तक वैध,परस्पर सहमति से कुल 5 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है
*औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा वार्ता यूनियन / परिषद को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएँ नियमों के अनुसार सुनिश्चित की जाएँगी।





