रांची:- डीजीएमएस द्वारा जारी रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट होल्डरों ( DGMS द्वारा जारी प्रतिबंधित खनन दक्षता प्रमाण-पत्र ) के प्रमोशन के मामलों पर सीआईएल के सीएमडी मिट में सहमति नहीं बन सकी।सीएमडी मिट में असहमति का कारण बड़ा ही दिलचस्प है।उल्लेखनीय है इस मामले को काफी समय से रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट होल्डर अपने कैरियर ग्रोथ को लेकर काफी सक्रिय थे।सभी यूनियनों को ज्ञापन दिया था।सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया था।इस मुद्दे को लेकर कई नेताओं ने सीआईएल चेयरमैन से मिलकर इस मुद्दे को उठाया था।चेयरमैन पीएम प्रसाद ने आश्वासन भी दिया था।
ताजा मामला :- 6 मई 2025 को सीआईएल एपेक्स की हुई बैठक में ये मुद्दा उठा।तब चैयरमैन श्री प्रसाद ने सकरात्मक पहल की बात कही।जानकारी के मुताबिक श्री प्रसाद के 31 अक्टूबर 2025 सेवानिवृत्त होने के पूर्व 17 अक्टूबर 2025 को 186 वीं सीएमडी मिट(बैठक) हुई।जिसमें इस मुद्दे पर विचार – विमर्श किया गया।आधिकारिक जानकारी के अनुसार सीएमडी मिट में, ” इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी की प्रतिबंधित प्रमाण पत्र को अनुमति दी जाए।क्योंकि इससे भूमिगत उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।तथा सीनियरिटी तय करने में अनेक जटिलताएं उत्पन्न हो सकती है।इनमें प्रथम श्रेणी – सेकेंड क्लास – तथा रिस्ट्रिक्टेड – अन रिस्ट्रिक्टेड के बीच भेद जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं “। सीएमडी मिट के असहमति से कई जानकर असहमत हैं।उनका कहना है कि पिछले 5 सालों के आकड़ो को देखें तो पाएंगे कि भूमिगत खदानों से उत्पादन की स्थिति दयनीय है।वर्ष 2020 -21 में 26.45 एमटी,20201 – 22 में 25.62 एमटी,2022 – 23 में 25.49 एमटी,2023 -24 में 26.02 एमटी और 2024 -25 में 25.44 एमटी कोयला ही भूमिगत खदानों से उत्पादन हुआ है।



