रांची : कोल इंडिया के अधिकारियों के ट्रांसफर नीति को लेकर सोशल मीडिया में बवाल मचा हुआ।फेसबुक के कई ग्रुप इस बारे में काफी कुछ लिखा जा रहा है,जिन पर तरह तरह के कमेंट किए जा रहे हैं।कोयला मजदूरों के सबसे बड़े फेसबुक ग्रुप में एक पोस्ट हुआ,जिसमें ये खुलासा हुआ कि कोल इंडिया मुख्यालय में 34 साल,33 साल,28 साल से अधिकारी जमे हुए हैं।आश्चर्यजनक बात यह है कि इस मुद्दे पर कोल इंडिया का विजिलेंस विभाग अनजान बना हुआ है।जानकारों के मुताबिक ई5 से ई6 में प्रमोशन होने के बाद अधिकारियों का दूसरे कंपनी में तबादला होता है।पर वर्ष 2024,वर्ष 2025 में रिटेन का खेल शुरू हुआ।प्रमोशन पाए कुछ अधिकारियों का तबादला दूसरे कंपनियों में नहीं हुआ।इसके लिए मेडिकल समेत तमाम कारण बताए गए।सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि तबादला नीति बनाने वाले मानव संसाधन विभाग के दो टॉप अधिकारी राजर्षि धर 28 वर्षों से एवं वी सुरपुरेड्डी 19 सालों से सीआईएल मुख्यालय के मानव संसाधन विभाग में जमे हुए हैं।जानकर कहते हैं कि सोचिए नीति बनाने वाले विभाग का ये हाल है तो अन्य विभागों की कल्पना कर सकते हैं।चर्चा तो रिटेन के नाम पर लेनदेन की भी है।एक अधिकारी गोपनीयता की शर्त पर कहते हैं कि मैचुअल ट्रांसफर का कोई नीति नहीं है।जैसे दो कंपनी के अधिकारी मैचुअल ट्रांसफर के लिए आवेदन देते हैं।दोनों कंपनियों से एनओसी होकर सीआईएल मुख्यालय जाता है।ऐसे आवेदनों की फ़ाइल इस टेबल से उस टेबल तक वर्षो तक चलते रहती है।आदेश कब और कितने दिनों में निकलेगा ये केवल सीआईएल मुख्यालय के मानव संसाधन विभाग के अधिकारी ही जानते हैं।या फिर आप चढ़ावा चढ़ाइए,आदेश अविलंब जारी हो जाता।वे कहते हैं ईसीएल से एक अधिकारी सीआईएल मुख्यालय ले जाए गए हैं।वे मानव संसाधन विभाग के मुखिया के करीबी हैं ,जो इस खेल के असली सूत्रधार हैं।सूत्रों की माने तो सीआईएल के इस खेल की शिकायत पीएमओ,कोयला मंत्रालय और सीवीसी से की गयी है।एक आंकड़े के मुताबिक 15 वर्षो से अधिक समय से सीआईएल की अनुषंगी कंपनियों में करीब 1954 अधिकारी जमे हुए हैं।इनके लिए कोई तबादला नीति लागू नहीं होती।शिकायत में पूरे मामले एवं विजिलेंस विभाग की भूमिका की गहन जांच की मांग की गयी है।सोशल मीडिया का लिंक निम्न है :-https://www.facebook.com/share/p/1G79E5XAHc/





