धनबाद :- सीएमपीएफ द्वारा डीएचएफएल में निवेश 1390.25 करोड़ में से 727.67 करोड़ रुपये डूबने के मामले की कोयला मंत्रालय के विजिलेंस ने किया।जांच में रुपये डूबने की जिम्मेदारी तय हुई।विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट कोयला मंत्रालय को सौंप दिया।कोयला मंत्रालय ने सलाह के लिए इस जांच रिपोर्ट को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त(सीवीसी) को भेजा।सीवीसी ने इस पर अपनी सलाह कोयला मंत्रालय को करीब 8 – 10 महीने पूर्व दे दिया।पर अब तक कार्रवाई तो दूर, दोषी का नाम तक सार्वजनिक नहीं हुआ।इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चहुँओर चुप्पी है। 22 फरवरी 2024 को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की मीटिंग में कोल सचिव ने स्वयं इस बात की जानकारी दिया था कि , ” जांच पूरी हो चुकी है,सीवीसी का सलाह मिल चुका है”। ऐसे में बहुत सवाल उठ रहे हैं। अहम सवाल यह है जब सब हो चुका है तो फिर दोषी को सजा अब तक क्यों नहीं मिली ? कब तक मिलेगी ? चर्चा है कि दोषी को बचाने की कवायद हो रही है क्योंकि इस मामले में कई लोग फंस सकते हैं।बता दें कि जब डीएचएफएल की स्थिति बिगड़ रही थी तब फंड मैनजरों ने रिडेम्पशन क्लाउज के तहत निवेशित राशि वापस लेने की अनुमति सीएमपीएफ से मांगी।करीब आठ महीने के विलंब के बाद अनुमति जब मिली तबतक डीएचएफएल दिवालिया घोषित हो चुका था।





