रांची :- कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की चुनौती बढ़ती जा रही है।लगातार दो वर्षों से लक्ष्य चुकने वाली सीआईएल को कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से बढ़ते उत्पादन बड़ा चुनौती है।आने वाले समय में उत्पादन करने वाले कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों की संख्या बढ़ेगी तो निश्चित रूप से उत्पादन बढ़ेगा।जितना उत्पादन इन खदानों से बढ़ेगा उतना ही चुनौती सीआईएल की बढ़ने वाली है।जानकारों की माने तो अगस्त 2024 तक 55 कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन हो रहा है।इनमें दस खदानें ऐसी हैं जिन्हें कोयला बेचने का अधिकार प्राप्त है।जानकर कहते हैं कि इन खदानों में उत्पादन लागत सीआईएल से कम है तो वे कोयला भी सीआईएल से कम दर पर बेचेंगे।सीआईएल में भारी संख्या में श्रम शक्ति है पर लगभग 80 प्रतिशत कोयले का उत्पादन आउट सोर्स एवं एमडीओ मोड़ से हो रहा है।वर्ष 2024 – 25 में सीआईएल ने निर्धारित लक्ष्य 838 एमटी के विरुद्ध 781.075 एमटी उत्पादन किया।इनमें विभागीय उत्पादन का हिस्सा मात्र 268.859 एमटी है जबकि आउट सोर्स एवं एमडीओ मोड की हिस्सेदारी 512.216 एमटी है।यही नहीं वर्ष 2023 -24 में भी सीआईएल लक्ष्य हासिल करने में चूक गयी थी।दूसरी ओर कैप्टिव व वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन लगातार बढ़ता जा रहा है।वर्ष 2024 – 25 में लक्ष्य 170 एमटी को पार करते हुए 190.95 एमटी उत्पादन किया।वर्ष 2015 – 16 से 32.553 एमटी से शुरुआत हुई थी।कोयला खनन विशेषज्ञयों के मुताबिक सीआईएल द्वारा चुनौती से निपटने के लिए भविष्य में एमडीओ और आउट सोर्स की गति करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।




