रांची :- कोयला अधिकारियों के वेतन विसंगति का मामला निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। आज जबलपुर हाई कोर्ट में कोल अधिकारियों के वेतन विसंगति के मामले की सुनवाई हुई।प्रबंधन के अधिवक्ता ने कहा कि वेतन विसंगति पर कोल मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपनी अनुशंसा दे दी है।अनुशंसा सक्षम ऑथोरिटी के पास स्वीकृति के लिए गया हुआ है।इसके लिए 15 दिन की मोहलत दी जाए।इस पर अधिकारियों के अधिवक्ता ने कहा कि 7 अप्रैल को सुनवाई में माननीय कोर्ट ने 8 सप्ताह में कमेटी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।8 सप्ताह से काफी अधिक समय गुजर गया है।इस पर माननीय कोर्ट ने प्रबंधन के अधिवक्ता को सक्षम ऑथोरिटी से स्वीकृत रिपोर्ट एक सप्ताह में प्रस्तुत करने की बात कहते हुए सुनवाई की अगली तारीख 9 अक्टूबर तय कर दिया।मामला :- वेतन विसंगति सुधार की मांग को लेकर अधिकारियों ने जबलपुर समेत कई हाई कोर्ट में याचिका दायर किया था।29 अगस्त 2023 को जबलपुर हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद 60 दिनों के अंदर समाधान करने एवं तत्काल 22 जून 2023 को कोयला मंत्रालय द्वारा जारी जेबीसीसीआइ 11 को लागू करने का पत्र निरस्त कर दिया।इसके बाद प्रबंधन डबल बेंच में अपील किया जहां से राहत मिली।इसके बाद प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर सभी मुकदमे को क्लब कर सुप्रीम कोर्ट में ही सुनवाई के आग्रह किया।नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को क्लब करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट को सुनवाई करने का निर्देश दिया। 7 अप्रैल 2025 को जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।जिसमें डीपीई गाइडलाइंस के उल्लंघन की बात कही गयी।इस प्रबंधन ने कहा कि वेतन विसंगति दूर करने हेतु कोल मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित किया है।जिसकी दो बैठक हो चुकी है।इस पर कोर्ट ने 8 सप्ताह का मोहलत प्रदान किया।उसके बाद आज सुनवाई हुई।
कमेटी :- सीआईएल चेयरमैन की पहल पर कोल मंत्रालय के संयुक्त सचिव बीबी पति की अध्यक्षता में एक कमेटी गठन किया गया।जिसमें सीआईएल के डायरेक्टर एचआर डॉ विनय रंजन,एनसीएल के डायरेक्टर एचआर मनीष कुमार, एमसीएल के डायरेक्टर एचआर केशव राव और डीपीई के एक प्रतिनिधि शामिल थे। उक्त कमेटी की बैठक हुई।जिसके बाद कमेटी ने कोल अधिकारियों को महारत्ना का पे स्केल देने का अनुशंसा किया है।ये अनुशंसा कोयला मंत्रालय के पास है।जानकारी के अनुसार कोल सचिव के हस्ताक्षर के बाद कोयला मंत्री का हस्ताक्षर होगा।इसके बाद कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।कोर्ट का मुहर लगते ही कोल अधिकारियों को महारत्ना पीएसयू का वेतन लागू हो जाएगा।




