धनबाद :- बीसीसीएल प्रबंधन ने आज अपना रौद्र रूप दिखाया। धरना – प्रदर्शन करने पहुंचे सेवनिवृतों के पंडाल को सीआईएसएफ ने उखाड़ दिया।सेवानिवृत्त आग्रह करते रहे गए लेकिन सीआईएसएफ के जवान नहीं माने।सेवनिवृतों के अनुसार ये सब बीसीसीएल के निदेशक कार्मिक के इशारे पर हुआ। एक यूनियन के कार्यकर्ता पुतला दहन करने पहुंचे ,सीआईएसएफ जवानों ने उनसे पुतला छीन लिया।दोनों संगठनों ने बीसीसीएल के डीपी पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।सेवानिवृत्त कोयला खदान मजदूर संघ के सदस्य अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अपनी मांगों को लेकर धरना पहुंचे।धरना स्थल पर वक्ता सम्बोधन कर ही रहे थे कि भारी संख्या में सीआईएसएफ के जवान पहुंचे और धरना स्थल पर लगे पोस्टर बैनर को खोल दिया।संघ को बीच में ही धरना समाप्त करना पड़ा। संघ के बीसीसीएल जोन के महामंत्री बिंदेश्वरी प्रसाद ने कहा कि बीसीसीएल प्रबंधन ने सेवनिवृतों के साथ तानाशाही का रुख अपनाते हुए संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है।जबकि हमने आंदोलन की सूचना 15 फरवरी को ही रिसीव कराया था।
अग्रगामी झारखंड कोलिएरी मजदूर यूनियन ने 3 मार्च को बीसीसीएल के सीएमडी,डीपी एवं बरोरा एरिया के जीएम का पुतला दहन का एलान करते हुए प्रबंधन को सूचना दिया था।जब यूनियन के कार्यकर्ता पुतला दहन करने पहुचें तो सीआईएसएफ के जवान पहुंचे और पुतला छीन लिए।यूनियन के बीसीसीएल रीजनल सचिव महेश कुमार ने कहा कि जितनी मुस्तैदी सीआइसीएफ ने पुतला दहन रोकने में दिखाया,उतना अगर कोयला चोरी रोकने में दिखाता तो बीसीसीएल का भला होता।उन्होंने कहा कि बीसीसीएल प्रबंधन की इस कायरतापूर्ण कार्रवाई से साबित हो गया कि इनलोगों की मंशा चोरी और करप्शन रोकना नहीं बल्कि करप्ट लोगों बचाना है।इसके विरोध में हम और उग्र आंदोलन करेंगे।





