धनबाद :- कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक कोल ब्लॉक आवंटियों के हित मे बहुत बड़ा फैसला लेते हुए कोल इंडिया और इसके अनुषंगी कम्पनियों के नीति – निर्देशों में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के बाद कोल इंडिया और इसकी अनुषंगी कम्पनियां कमर्शियल माइनिंग के तहत आवंटित कोल ब्लॉक को अपनी भूमि पट्टे पर दे सकते हैं। यानी कोयला खदानों को एमडीओ मोड एवं रेवेन्यू शेयर पर देने के बाद अब जमीनें भी वाणिज्यिक कोल ब्लॉक आवंटियों को रेवेन्यू पर लीज पर देगीं। इसके तहत यदि वाणिज्यिक कोयला खनन के तहत कोल ब्लॉक का क्षेत्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के स्वामित्व वाले क्षेत्र के साथ ओवरलैप करता है,तो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम उस भूमि को पट्टे पर दे सकते हैं।कोयला मंत्रालय का कहना है कि वाणिज्यिक खनन के लिए आवंटित कई कोल ब्लॉक सरकारी कम्पनियों द्वारा अधिग्रहित भूमि के साथ ओवरलैप करती हैं।चूंकि सीबीए / सीएमएन के तहत सरकारी कम्पनियों के लिए अधिगृहित भूमि निजी खदान मालिकों को को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। यह सब वाणिज्यिक खनन में तेजी लाने के लिए गया है।
पीएसयू वाच( PSU WATCH) के मुताबिक नीति दिशा – निर्देशों में संशोधन के लिए 18 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल गयी है। संशोधित नीति दिशा – निर्देश के अनुसार , ऐसी भूमि के टुकड़े (जहां ओवरलैप है) में खनन और सतही अधिकार कोल कमानियों द्वारा आवंटियों को दिया जा सकता है। सरकारी कम्पनियों द्वारा जमीन का पट्टा दीर्घकालिक यानी 50 वर्षो के लिए दिया जा सकता है।इसके एवज में सरकारी कोयला कम्पनियों को प्रति वर्ष प्रति हेक्टेयर 1000 रुपये किराए के रूप में मिलेगा। दिशा – निर्देशों में कहा गया है वे भूमि अधिग्रहण की लागत,पुनर्वास की लागत, भूमि के बदले रोजगार की लागत आदि भी वहन करेगा। नियम परिवर्तन पर कोल मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एम नागराजू ने पीएसयू वाच से कहा , ” नीति दिशा – निर्देशों में संशोधन से वाणिज्यिक कोयला खदानों को जल्द चालू करने में मदद मिलेगी।इससे सफल बोलीदाताओं के सामने आने वाली कठिनाइयां दूर होगी और सरकार कम्पनियों को राजस्व भी मिलेगा”।


