रांची :- कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) इस चालू वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य 875 एमटी के बजाए 800 एमटी कोल उत्पादन के लिए संघर्ष कर रहा है।अगर एक एनसीएल को छोड़ दें तो बाकी सभी अनुषंगी कंपनियां अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 तक के लक्ष्य से पीछे चल रही हैं। उत्पादन में कमी के साथ साथ कोल डिस्पैच में सीआईएल और इसकी अनुषंगी कंपनियां पीछे चल रही हैं।गत वित्तीय वर्ष के अप्रैल 2024 से नवंबर 2024 तक सीआईएल ने 471 एमटी कोयले का उत्पादन एवं 492.6 कोयले का डिस्पैच किया था।जबकि इस चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 तक 453.5एमटी कोयले का उत्पादन एवं 478.9 एमटी कोयले का डिस्पैच किया है।दूसरी ओर कैप्टिव / कमर्शियल माइनिंग का उत्पादन और डिस्पैच लगातार बढ़ता जा रहा है।गत वित्तीय वर्ष के अप्रैल 2024 से नवंबर 2024 तो 80.23 एमटी कोयले का उत्पादन किया जबकि इस चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 तक 112.65 एमटी कोयले का उत्पादन एवं 107.82 एमटी डिस्पैच किया।जानकर बताते हैं आने वाले समय में कैप्टिव/कमर्शियल माइनिंग से उत्पादन एवं डिस्पैच और बढ़ेगा।उत्पादन बढोतरी के लिए सरकार ने माइन और एक्स्प्लोरेशन प्लान के लिए 45 निजी एजेंसियों को अधिकृत किया।महत्वपूर्ण यह है कि सीआईएल के कोयले की डिमांड में कमी आयी है।पिछले दिनों ईसीएल ने आधिकारिक रूप से ये स्वीकार किया है कि कोयले की डिमांड में कमी आयी है।बताते हैं कि कोयले की डिमांड में कमी से कर्मचारियों के वेतन भुगतान में विलंब एवं संडे ,हॉलिडे में कटौती होने लगी है।कोयला खनन के एक विशेषज्ञ कहते हैं :- सीआईएल 875 एमटी का लक्ष्य नहीं हासिल कर पाएगी,कोयले की बिक्री प्रभावित है,इस कारण लाभ में कमी आएगी,जिसका असर कर्मचारियों पर पड़ना स्वभाविक है “।




