रांची :- अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ का 19 वें त्रैवार्षिक अधिवेशन में नयी कमेटी गठित होते ही कई के दिल के अरमा आंसुओं में बह गए,तो कई ने चौका दिया।पदाधिकारियों के चयन पर जमीनी और समर्पित कार्यकर्ता पदाधिकारियों के चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहते हैं की दशकों से समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा किया जा रहा है।
संघ के कई नेताओं ने गोपनीयता की शर्त पर बातचीत करते हुए कहा कि आशीष मूर्ति की जगह सुजीत कुमार सिंह का महासचिव बनना बड़ा आश्चर्यजनक है।ये रेस में थे ही नहीं।श्री मूर्ति को बड़ा झटका लगा है।वहीं संगठन मंत्री अशोक मिश्रा को उम्मीद थी कि वे अध्यक्ष / महामंत्री बनेंगे,लेकिन उनके अरमानों पर पानी फिर गया।हालांकि उनके दुबारा संगठन मंत्री बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।संघ के सूत्र बताते हैं कि जबसे वे संगठन मंत्री बने हैं तब से बहुत सारे समर्पित कार्यकर्ता संगठन छोड़ दूसरे संगठन में चले गए,ऐसे में उनको दुबारा संगठन द्वारा संगठन मंत्री का दायित्व देना समझ से परे।निवर्तमान अध्यक्ष टिकेश्वर सिंह राठौर को दूसरा टर्म नहीं मिलना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।कुछ लोग कहते हैं की राठौर के अध्यक्ष काल में संघ एसईसीएल में पहली बार पहले स्थान पर काबिज हुआ,ऐसे में उनको दुबारा मौका नहीं देना उनके साथ नाइंसाफी है।वहीं बीसीसीएल के केके सिंह को भी संघ में पद दिए जाने पर सवाल खड़ा हो रहा है।लोग कहते हैं कि मात्र कुछ वर्ष पहले वे दूसरे संगठन से आए।इतने कम समय में महासंघ का पदाधिकारी बनाया जाना,संघ के समर्पित कार्यकर्ताओं का अपमान है।डब्ल्यूसीएल के पेंच,कन्हान और पाथाखेड़ा के कार्यकर्ताओं में आक्रोश है।उनका कहना है कि सदस्यता के मामले में ये तीनों एरिया संगठन की लाज बचाता है लेकिन महासंघ में कोई स्थान नहीं मिलता।उन्होंने सवालिया लहजे में कहा ” नागपुर एरिया के मूर्ति हैं,नागपुर नागपुर एरिया में संगठन फिसड्डी है पर मूर्ति पहले महासंघ के कोषाध्यक्ष थे इस बार उप महामंत्री।इसके अलावे डब्ल्यूसीएल संचालन समिति और सीएमपीएफओ बीओटी सदस्य है।वे आगे कहते हैं इसका असर इस बार के सदस्यता सत्यापन पर अवश्य पड़ेगा।बहरहाल देखिए आगे आगे होता है क्या।




