रांची :- एमसीएल के कॉरपोरेट कमेटियों में इंटक की यूनियन की ओसीएमएस की भागीदारी पर गम्भीर खतरा मंडरा रहा है।अधिकृत सूत्रों की माने तो 26 जनवरी तक ओसीएमएस के भाग्य पर फैसला संभव है।बताते हैं कि एमसीएल कॉरपोरेट समितियों में ओसीएमएस का चार प्रतिनिधित्व है।जिसका विरोध बीएमएस वर्षो करते आ रहा है।इधर एमसीएल की कॉरपोरेट समिति की तीन अक्टूबर 2025 को हुई मीटिंग में बीएमएस,एचएमएस और एटक के प्रतिनिधियों ने समितियों में समान प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया।जिस पर कोई फैसला नहीं हो सका।
ताजा मामला :- 14 नवंबर 2025 को एमसीएल के जीएम(एचआर/आईआर) ने ओसीएमएस के जेनरल सेक्रेटरी को पत्र देकर दस दिनों में जवाब मांगा।पत्र में लिखा है कि, “
महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की वैधानिक, गैर-वैधानिक, द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों में ओसीएमएस (OCMS) की भागीदारी को लेकर उठे विवाद के संबंध में यूनियनों द्वारा आपत्ति दर्ज करायी गयी।इस आलोक में सीआईएल से दिशा – निर्देश की मांग की गयी। कोल इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) ने अपने ई-मेल दिनांक 16 अक्टूबर 2025 के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि:
” एमसीएल की द्विपक्षीय अथवा त्रिपक्षीय बैठकों में किसी विशेष केंद्रीय ट्रेड यूनियन (INTUC) को सम्मिलित किए जाने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।“
साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोयला मंत्रालय के परामर्शदाता द्वारा दिनांक 11 जनवरी 2017 को जारी आदेश वर्तमान में प्रभावी एवं लागू है, और उसी के अनुसार निर्णय लिया जाना है।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में ओसीएमएस को नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा गया है कि एमसीएल की किसी भी वैधानिक अथवा गैर-वैधानिक समिति में उसकी भागीदारी क्यों जारी रखी जाए। संगठन को इस संबंध में अपना लिखित पक्ष 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो नियमों एवं प्रचलित आदेशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।बताते हैं कि संगठन ने अपना जवाब प्रबंधन को दे दिया है।इस बीच बताते हैं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बीएमएस नेता मिले एवं इस मुद्दे को उनके समक्ष रखा।सूत्र बताते हैं कि मंत्री श्री प्रधान ने इस मामले को लेकर कंपनी के सीएमडी और डी एचआर से बात किया।सूत्रों की माने तो एमसीएल में ओसीएमएस कोर्ट के आदेश पर आईआर में शामिल है।जैसे एसईसीएल और एनसीएल में।केंद्रीय मंत्री के निर्देश का बावजूद एमसीएल प्रबंधन फूंक फूंक कर इस मामले पर कदम बढ़ा रहा है।संगठन द्वारा दिए गए उत्तर को अटॉर्नी जेनरल को भेज कर उनसे कानूनी सलाह की मांग की गयी है।सूत्रों के मुताबिक अटॉर्नी जेनरल अवकाश पर हैं।अवकाश से लौटते ही वे इस पर अपनी राय एमसीएल को देंगे।सूत्रों के अनुसार 26 जनवरी से पूर्व अटॉर्नी जेनरल अपनी राय दे देंगे।तब एमसीएल प्रबंधन





