मुंबई:- ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र(सीआरईए) ने देश मे बढ़ते सल्फर डाई ऑक्साइड(SO2) उत्सर्जन से निपटने के लिए देश के कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों(थर्मल पॉवर स्टेशन) में “त्वरित फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी ) लगाने का सुझाव दिया है।सीआरईए के मुताबिक यदि यह पूर्णरूपेण लागू हो जाए तो SO2 के उत्सर्जन में 64 % की कमी आ सकता है।जिससे वायु गुणवत्ता और जन स्वस्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।क्योंकि 8.9 मिलियन टन धान की पराली जलाने से जितना SO2 उत्पन्न होता है,थर्मल पॉवर स्टेशन इससे 240 गुणा अधिक SO2 उत्सर्जन करता है।विश्व में SO2 के सबसे बड़े उत्सर्जक भारत की कोयला ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भरता वायु एवं सार्वजनिक स्वस्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2015 में शुरू किए उत्सर्जन मानकों लागू करने के निर्देश के बावजूद लगभग एक दशक के बाद देश में मात्र 8% ताप विद्युत संयंत्रों ने अभी तक लागू किया है।सीआरईए के अनुमान के मुताबिक जून 2022 से मई 2023 की अवधि के दौरान ताप विद्युत संयंत्रों द्वारा 4327 किलो टन SO2 उत्सर्जित किया गया।जिसमें राज्य,केंद्र एवं निजी क्षेत्रों का योगदान 1563 किलोटन,1426 किलोटन,और 1339 किलोटन था।【DH से साभार】





